क्रियात्मक शोध (Action Research)
विषय : क्रियात्मक शोध (Action Research)
1. क्रियात्मक शोध का अर्थ
क्रियात्मक शोध वह शोध है जिसे शिक्षक अपनी कक्षा, विद्यालय या शिक्षण प्रक्रिया में उत्पन्न समस्याओं के समाधान हेतु स्वयं करता है। इसका उद्देश्य तत्काल समस्या का व्यावहारिक समाधान करना होता है।
परिभाषा
Stephen M. Corey के अनुसार
“क्रियात्मक शोध वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा शिक्षक अपनी समस्याओं का वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन करके उनके समाधान का प्रयास करता है।”
सरल शब्दों में
जब शिक्षक अपनी कक्षा की किसी समस्या — जैसे विद्यार्थियों की कम उपलब्धि, अनुशासनहीनता, पढ़ने में कठिनाई आदि — का अध्ययन करके समाधान खोजता है, तो उसे क्रियात्मक शोध कहते हैं
2. क्रियात्मक शोध की विशेषताएँ
1. यह व्यावहारिक समस्या पर आधारित होता है।
2. शोधकर्ता स्वयं शिक्षक होता है।
3. इसका उद्देश्य तत्काल सुधार करना होता है।
4. यह छोटे स्तर पर किया जाता है।
5. इसमें वैज्ञानिक पद्धति का प्रयोग होता है।
6. यह शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाता है।
3. क्रियात्मक शोध के उद्देश्य
कक्षा शिक्षण में सुधार करना
विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान करना
शिक्षण विधियों की प्रभावशीलता बढ़ाना
विद्यालयी वातावरण को बेहतर बनाना
शिक्षक में अनुसंधान क्षमता विकसित करना
4. क्रियात्मक शोध की गुणवत्ता संबंधी मुद्दे
क्रियात्मक शोध की सफलता उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करती है। निम्नलिखित बिंदु महत्वपूर्ण हैं —
(1) समस्या का स्पष्ट चयन
समस्या वास्तविक एवं स्पष्ट होनी चाहिए।
समस्या शिक्षक के कार्यक्षेत्र से संबंधित हो।
उदाहरण
“कक्षा 8 के विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि की कमी।”
(2) वस्तुनिष्ठता (Objectivity)
शोध में व्यक्तिगत पक्षपात नहीं होना चाहिए।
निष्कर्ष तथ्यों पर आधारित होने चाहिए।
(3) विश्वसनीयता (Reliability)
प्राप्त आँकड़े सही एवं भरोसेमंद होने चाहिए।
परीक्षण एवं अवलोकन उचित ढंग से किए जाएँ।
(4) वैधता (Validity)
शोध वही मापे जो वास्तव में मापना चाहता है।
प्रश्नावली एवं परीक्षण उपयुक्त होने चाहिए।
(5) उपयुक्त डेटा संग्रह
डेटा व्यवस्थित रूप से एकत्र किया जाए।
साक्षात्कार, प्रश्नावली, अवलोकन आदि का सही प्रयोग हो।
(6) समयबद्धता
शोध निर्धारित समय में पूरा होना चाहिए।
समस्या का समाधान शीघ्र प्राप्त होना चाहिए।
(7) व्यावहारिकता
शोध के सुझाव व्यवहार में लागू किए जा सकें।
समाधान सरल एवं उपयोगी हों।
(8) नैतिकता (Ethics)
विद्यार्थियों के साथ निष्पक्ष व्यवहार होना चाहिए।
गोपनीयता एवं सम्मान बनाए रखना चाहिए।
5. क्रियात्मक शोध के चरण / पद
क्रियात्मक शोध एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है। इसके प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं —
चरण 1 : समस्या की पहचान
कक्षा या विद्यालय की समस्या को पहचानना।
समस्या स्पष्ट एवं सीमित होनी चाहिए।
उदाहरण
“विद्यार्थियों की हिंदी लेखन क्षमता कमजोर है।”
चरण 2 : समस्या का विश्लेषण
समस्या के कारणों का अध्ययन करना।
विद्यार्थियों की कठिनाइयों को समझना।
संभावित कारण
अभ्यास की कमी
रुचि की कमी
गलत शिक्षण विधि
चरण 3 : परिकल्पना निर्माण
समस्या के समाधान हेतु संभावित अनुमान तैयार करना।
उदाहरण
“यदि विद्यार्थियों को प्रतिदिन लेखन अभ्यास कराया जाए तो उनकी लेखन क्षमता में सुधार होगा।”
चरण 4 : कार्य योजना बनाना
क्या करना है?
कब करना है?
किस प्रकार करना है?
इन सभी की योजना तैयार की जाती है।
चरण 5 : योजना का क्रियान्वयन
बनाई गई योजना को कक्षा में लागू करना।
नई शिक्षण विधियों एवं गतिविधियों का प्रयोग करना।
चरण 6 : डेटा संग्रह
परीक्षण, अवलोकन, प्रश्नावली आदि के माध्यम से जानकारी एकत्र करना।
चरण 7 : डेटा विश्लेषण
प्राप्त आँकड़ों का अध्ययन एवं तुलना करना।
सुधार की स्थिति ज्ञात करना।
चरण 8 : निष्कर्ष निकालना
यह देखना कि समस्या का समाधान हुआ या नहीं।
शोध के परिणाम लिखना।
चरण 9 : प्रतिवेदन लेखन
पूरे शोध कार्य का व्यवस्थित विवरण तैयार करना।
इसमें शामिल होते हैं —
समस्या
उद्देश्य
परिकल्पना
विधि
निष्कर्ष
सुझाव
6. कक्षा शिक्षण में क्रियात्मक शोध का महत्व
1. शिक्षण को प्रभावी बनाता है।
2. विद्यार्थियों की उपलब्धि बढ़ाता है।
3. शिक्षक में नवाचार की भावना विकसित करता है।
4. समस्या समाधान क्षमता बढ़ाता है।
5. विद्यालय में गुणवत्ता सुधार लाता है।
7. निष्कर्ष
क्रियात्मक शोध शिक्षा क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी प्रक्रिया है। यह शिक्षक को अपनी कक्षा की समस्याओं का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समाधान खोजने में सहायता करता है। इससे शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया अधिक प्रभावी, रोचक एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनती है।
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